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Thursday, April 2, 2020

Meena Books 12 - एक लड़की की कहानी

रामनवमी की आप सभी दोस्तों को शुभ कामनाएं 

आज मीना की कहानियों की श्रृंखला की अंतिम पुस्तक (हिंदी में प्रकाशित) आप सभी के सामने हैं. जैसे आज पूरा विश्व कोरोना से जूझ रहा है, वैसे ही इस पुस्तक में भी एक बेहद जानलेवा बीमारी (सौभाग्यवश अब इसे कण्ट्रोल करने की दवा उपलब्ध है) एड्स के बारे में जिक्र है कि किस प्रकार से हम एड्स के मरीज को हमेशा अपराधी के तौर पर देखते हैं और उससे बुरा व्यवहार करते हैं. 


अपनी सोच को बदलें क्योंकि हरेक एड्स का रोगी गलत नहीं होता मैंने खुद अपने आस-पास ऐसे लोगों को देखा है जो दुर्घटना या संक्रमित खून चढ़ाने के कारण इसके शिकार बने हैं. 

तो शिक्षाप्रद  मीना की कहानियों की श्रंखला में अंक 12 - एक लड़की की कहानी का आनंद लेवें. 

Meena Books 02 - आम का बँटवारा

मीना की कहानियों की श्रंखला में मैंने अब तक केवल 12  पुस्तकें ही देखी हैं जिनमें से दस पहले ही इस ब्लॉग पर मैंने पोस्ट की हुयी है. शेष बची दो पुस्तकें भी मैंने स्कैन और एडिट करके अपलोड कर दी हैं तो आज ये बारह कहानियों का सेट पूरा हो जाएगा. 

तो आज की पहली पुस्तक के रूप में प्रस्तुत है  - मीना की कहानियाँ  02  - आम का बँटवारा 

वैसे ये पुस्तक मैंने कई वर्ष पहले भी पोस्ट की थी, पर वो बेहतर क्वालिटी में नहीं थी. इस बार यह 400 DPI के Resolution में हैं. 

लड़के और लडकी के भोजन वितरण में भेदभाव पर आधारित यह पुस्तक अवश्य आपका मनोरंजक करेगी 

Tuesday, March 31, 2020

Meena Books 08 - मीना की तीन इच्छाएं

सुप्रभात मित्रों, 

आज Corona Virus  की भयावहता के चलते चारों ओर स्वच्छता और हाथ-धुलाई की बात चल रही है, हमारी प्राचीन संस्कृति में तो ये शुरू से है. दुर्भाग्यवश आज भी भारत में अनेकों लोग सफाई के साधारण से नियमों का पालन नहीं करते और यही शिशु मृत्यु दर का सबसे बड़ा कारण है. 



संक्रमण रहित समाज और स्वस्थ दुनिया - बस यही तो मीना की अपने  जीनी से तीन इच्छाएं थी. 


चलिए पढ़ते हैं मीना की कहानी - मीना की तीन इच्छाएं 

(यूनिसेफ के सौजन्य से - विशेषकर दक्षिण एशिया के देशों हेतु रचित)

Monday, March 30, 2020

Meena Books 03 - क्या मीना को स्कूल छोड़ना पड़ेगा ?


अक्सर हमारे देश में बेटियों को परिवार की विपरीत परिस्थितियों में पढाई छोड़नी पड़ती है, फिर चाहे वह छोटे बच्चे की देखभाल हो, घर या बाहर के काम में माता-पिता की मदद हो या घर में बुजुर्गों की देखभाल हो चाहे पैसे की समस्या हो. हमारे देश के गरीब और ग्रामीण तबकों में आज भी यह सामान्य बात है कि लड़कियों को स्कूल जाना छोड़ना पड़ता है. 


मीना के परिवार में भी ऐसी कुछ स्थिति आ पड़ती है कि उसे स्कूल जाना छोड़ने की नौबत आ जाती है, पर मीना और उसका परिवार, मीना की शिक्षिका के मार्गदर्शन में इस परेशानी से किस तरह उबरते हैं - इस छोटी से कथा में दिया गया है. 


पढ़िए और अपने छोटे बच्चों को भी पुस्तक पढ़ने हेतु प्रेरित करें 

डाउनलोड लिंक  (क्या मीना को स्कूल छोड़ना पड़ेगा ?)

Tuesday, March 10, 2020

Meena Books 05 - जीवन रक्षा

मीना की पुस्तकें UNICEF के द्वारा भारतीय समाज में जागरूकता लाने के उद्देश्य से शुरू की गयी थी. अधिकाँश पुस्तकें जो मेरे पास है उन्हें मैं अपलोड कर ही रहा हूँ, 2 या 3 ही बची हैं जिन्हें संभवतः इस सप्ताह के अंत तक मैं अपलोड कर दूंगा, ताकि एक सीरीज मेरी ओर से पूर्ण हो जाए.


आज की कहानी है - बच्चों में होने वाले सामान्य रोग डायरिया यानी दस्त के ऊपर. सामान्य से उपाय से जीवन बच सकता है परन्तु आज भी दुर्भाग्य से कई बच्चों को अपने जीवन की बलि देनी पड़ती है.

वैसे हम सब पढ़े लिखे हैं और बहुत सी बातें जानते हैं, फिर भी एक कहानी के रूप में 5 मिनट से भी कम समय निकालकर इसे पढ़े जरूर ....


Tuesday, February 18, 2020

Meena Books 06 - धौंसिए से कौन डरता है

हर स्कूल या मोहल्ले में ऐसे लड़के होते हैं जो अपनी धौंस जमाते हैं और सीधे-सादे लोगों को परेशान करते हैं. पर मीना और उसकी टोली ऐसे धौंसिए से नहीं डरते.

तो पढ़िए मीना और उसकी टोली का मुकाबला - इन शैतान लड़कों के साथ 

मीना 06 - धौंसिए से कौन डरता है 

With Love Anupam Agrawal and The ICE Project

Monday, January 13, 2020

मीना की कहानियाँ 07 - दहेज़ न लेना न देना


UNICEF द्वारा भारतीय उपमहाद्वीप में व्याप्त बुराइयों के प्रति लोगो को जागरूक करती मीना की कहानियों में इस बार का विषय है - दहेज़ प्रथा. इसी प्रथा की वजह से आज भी अनेक लोग अपने आँगन में एक नन्ही से कन्या के आगमन पर दुःख व्यक्त करते हैं क्योंकि अनेक आर्थिक रूप से कमजोर परिवार में कन्या का जन्म केवल एक बोझ लगने लगता है. 

आइये इस कथा से प्रेरित होकर इस प्रथा का विरोध करें. साथ में कहिये - 
'दहेज़ न लेना, न देना' 

मीना की कहानियाँ 07  - दहेज़ न लेना न देना 

With Love Anupam Agrawal and The ICE Project

Wednesday, December 4, 2019

मीना की कहानियाँ 11 - लड़का ही होगा

UNICEF द्वारा भारतीय उपमहाद्वीप में व्याप्त सामाजिक बुराइयों के प्रति बच्चों को जागृत करने के उद्देश्य से मीना रचित चरित्र की इस कथा में एक ऐसे व्यक्ति की कहानी है जिसके पुत्र-पुत्रवधू की संतान होने वाली है. होने वाले दादाजी लड़के की चाहत रखते हैं और यह मानते हैं कि केवल लड़का ही नाम उंचा कर सकता है. 

आगे क्या होता है, पढ़िए और मजा लीजिये 

आप भी डाउनलोड करके आनंद लीजिये - 

Saturday, November 23, 2019

मीना की कहानियाँ 01 - मुर्गियों की गिनती

जैसा की मीना की कहानियों के सभी पोस्ट में मैंने बताया है - (UNICEF) ने भारतीय उपमहाद्वीप में व्याप्त सामाजिक बुराइयों जैसे लिंग-भेद, निरक्षरता, अस्वच्छता, बाल-विवाह जैसे अनेक संवेदनशील विषयों के प्रति बच्चों को जागृत करने के उद्देश्य से मीना नमक चरित्र की रचना की थी और उस पर आधारित पुस्तकें, शैक्षणिक सामग्रियों, विडियो और सामूहिक मंच का आयोजन किया था. 

'मुर्गियों की गिनती' शीर्षक से  प्रस्तुत यह कहानी भारतीय समाज की उस मानसिकता को दर्शाती है जिसमें लड़कियों के लिए घर का काम काज सीखना आवश्यक माना जाता है और उनका स्कूल जाना अनावश्यक माना जाता है. 

आप भी डाउनलोड करके आनंद लीजिये - 

Friday, November 22, 2019

मीना की कहानियाँ 04- बेटियों की देखरेख

वर्ष 2002 में यूनिसेफ (UNICEF) ने भारतीय उपमहाद्वीप में व्याप्त सामाजिक बुराइयों जैसे लिंग-भेद, निरक्षरता, अस्वच्छता, बाल-विवाह जैसे अनेक संवेदनशील विषयों के प्रति बच्चों को जागृत करने के उद्देश्य से मीना नमक चरित्र की रचना की थी और उस पर आधारित पुस्तकें, शैक्षणिक सामग्रियों, विडियो और सामूहिक मंच का आयोजन किया था. 

'बेटियों के देखरेख' नाम से प्रस्तुत यह कहानी भारतीय समाज में लड़कियों के चिकित्सा (इलाज़) में परिवार की उदासीनता को प्रदर्शित करती है. आ  है आपको अवश्य पसंद आएगी...और सकारात्मक सोच का विकास करेगी 

मीना की कहानियाँ 09 - छोटी सी दुल्हन

वर्ष 2002 में यूनिसेफ (UNICEF) ने भारतीय उपमहाद्वीप में व्याप्त सामाजिक बुराइयों जैसे लिंग-भेद, निरक्षरता, अस्वच्छता, बाल-विवाह जैसे अनेक संवेदनशील विषयों के प्रति बच्चों को जागृत करने के उद्देश्य से मीना नमक चरित्र की रचना की थी और उस पर आधारित पुस्तकें, शैक्षणिक सामग्रियों, विडियो और सामूहिक मंच का आयोजन किया था. 

आज प्रस्तुत पुस्तक 'कन्या के बाल विवाह' के मुद्दे पर आधारित है. आशा है आपको अवश्य पसंद आएगी...

Saturday, November 16, 2019

मीना की कहानियाँ 10 - मुझे स्कूल अच्छा लगता है

वर्ष 2002 में यूनिसेफ (UNICEF) ने भारतीय उपमहाद्वीप में व्याप्त सामाजिक बुराइयों जैसे लिंग-भेद, निरक्षरता, अस्वच्छता, बाल-विवाह जैसे अनेक संवेदनशील विषयों के प्रति बच्चों को जागृत करने के उद्देश्य से मीना नमक चरित्र की रचना की थी और उस पर आधारित पुस्तकें, शैक्षणिक सामग्रियों, विडियो और सामूहिक मंच का आयोजन किया था. वर्तमान में अभी मुझे यह किसी भी विद्यालय में सक्रिय नहीं मिला. 

इसके पीछे कारण जो भी हो, लेकिन मीना  पर आधारित पुस्तकें बेहद रोचक कहानी और सुन्दर चित्रों से सुसज्जित हैं, आज काफी दिनों बाद ये 12 पुस्तकें मुझे प्राप्त हुयी हैं तो बारी-बारी से अच्छे क्वालिटी में इन्हें अपलोड करता रहूँगा. आशा है आप सभी को भी पसंद आएँगी.