Sunday, February 19, 2017

माफ़ीनामा

इस ब्लॉग को चाहने वाले सभी मित्रों और शुभचिंतकों से एक बेहद लम्बे अंतराल के लिए माफ़ी चाहता हूँ. जीवन की कुछ बड़ी परेशानियों से जूझते हुए कई दिनों या यूं कहे महीनों तक मैं लगभग ऑनलाइन नहीं हो पाया. इसी वजह से काफी सारे कमेंट्स भी पेंडिंग ही रह गए और आज जा कर ब्लॉग पर दिखने शुरू हुए हैं.

सभी दोस्तों से बस इतना ही वायदा है कि किसी भी चाहे-अनचाहे कारणों से मैं ब्लॉग पर कुछ समय सक्रिय न भी हो सकूं, तब भी जब समय होगा मैं पोस्ट करता रहूँगा.

जीते जी ये ब्लॉग बंद नहीं होने दूंगा :-)

13 comments:

KUMAR ASHUTOSH NARAYAN said...

KOI BAAT NAHIN BHAI.. IT'S LIFE..

Aryan Satija said...

That's the spirit

jammy said...

आपका बहोत बहोत धन्यवाद,आशा है आपका जीवन मंगलमय होगा और आगे आपको समय मिला करेगा,,पाठक जी के नॉवेल भी क्या करेंगे आप?पहली बार आपके ब्लॉग पे आया हूँ इसलिए ये प्रश्न पूछा

Ravi Kumar said...

Bhai ap maafi nahi appreciation ke patr ho itne saalon se ap Comic fans ko serve kar rahe ho
Hamaare prarthana apke aur apki family ke saath hai
V wish u best of luck in u r life
V will keep on visiting u r blog until v r alive

Anupam Agrawal said...

@Kumar Santosh Narayana - Yes Bhai, the ups and downs are parts of life. Hope that now I will get the better share of things in life :-)

Anupam Agrawal said...

@Aryan Satija - Thanks for the comment.

I love books and I want the flame to burn till the end of my life.

Though, for running a blog, encouragement is also needed. :-)

Phantom said...

अनुपमजी, कॉमिक्स की दुनिया में आप हमेशा कार्यरत रहे और खोया हुआ खजाना बाटते रहे येही कामना करूँगा |

Anupam Agrawal said...

@Jammy - आपके कमेंट के लिए आपका भी बहुत बहुत धन्यवाद. जैसे जैसे समय मिलेगा मैं ब्लॉग पर जितना हो सके उतना कार्य करने का पूरा प्रयास करूँगा. जहाँ तक रही बात पाठक जी के नोवेल्स की, तो उनके लिए अभी सोचा नहीं है, वैसे भी नावेल स्कैन करना काफी कठिन कार्य है. शायद भविष्य में करूँ.

पर वैसे पाठक जी के उपन्यास शायद प्रिंट हो ही रहे हैं, तो उनकी लेखनी का सम्मान करते हुए उन्हीं उपन्यासों के बारे में विचार करूँगा जो आउट ऑफ़ प्रिंट हो चुके हैं.

Anupam Agrawal said...

रवि कुमार भाई - आपके शुभकामनाओं के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद भाई. बस यही दुआएं हैं जो शायद अभी तक जीवन में उम्मीद जगाये रखे हैं. ब्लॉग पर पोस्टिंग शुरू हो चुकी है और देश-विदेश की पठनीय और संग्रहनीय पुस्तकें जल्द से जल्द अपलोड करते रहूँगा, इस आशा के साथ...

Anupam Agrawal said...

@Phantom - आप सभी दोस्तों की दुआ रहेगी तो ये सिलसिला चलता ही रहेगा भाई. मैंने खुद चाहता हूँ कि ये सिलसिला न रुके, पर यही तो जिंदगी है - चलती अपने मन से ही है.

Manohar Marandi said...

Anupam bhai,keep it up.I always waited for your uploads.

ashutosh sharma said...

Great spirit Anupam bhai. .....always waiting for your uploads. ...

Abhishek Bardhan said...

Anupam Bhai, Koi baat nahi.. Glad to see you back. We are with you.. God bless!!