Sunday, March 2, 2014

इंद्रजाल कॉमिक्स की पचासवीं वर्षगांठ (मार्च 1964-मार्च 2014)

इंद्रजाल कॉमिक्स का यह प्रथम अंक
मार्च 1964 में प्रकाशित हुआ था
इस ब्लॉग पे आने वाला हर पाठक कॉमिक्स प्रेमी है और सभी के अपने-अपने पसंदीदा चरित्र / श्रृंखलाएं और प्रकाशन हैं जिनके प्रति प्रेम हमने बचपन से लेकर आज तक जिन्दा रखा हुआ है. 

ऐसे ही एक अत्यंत गौरवशाली प्रकाशन इंद्रजाल कॉमिक्स ने मार्च 2014 को अपने प्रथम अंक प्रकाशन के 50 साल पूरे कर लिए हैं, यूं तो ये प्रकाशन भारतीय कॉमिक्स की दुनिया के अवसान के साथ बंद हो गया परन्तु आज भी हम कॉमिक्स प्रेमियों के दिलों पर इसका राज चलता है.

और जहां तक रही बात इंद्रजाल कॉमिक्स के हिंदी प्रेम की, तो कॉमिक्स संग्रहकर्ताओं के बीच श्री अनुराग दीक्षित जी का नाम इस सूची में प्रथम है, जिनमे मैंने इस प्रकाशन के हिंदी संस्करण  के प्रति अपार लगाव और समर्पण पाया है.

इस विस्मृत कर देने वाले प्रकाशन के 50 वर्ष के उपलक्ष में उन्होंने हम सभी के साथ एक शानदार डेटाबेस शेयर किया है जिसमे उन्होंने बेहद मेहनत से जुटाए गयी जानकारियों का समावेश किया है. जिसमे सबसे प्रमुख है इंद्रजाल में प्रकाशित प्रत्येक कथा के लेखक और चित्रकार का नाम जिसका उल्लेख कभी भी प्रकाशन ने नहीं हुआ था. साथ ही सभीप्रकाशित अंकों के हिंदी संस्करण के आवरण MS-WORD फ़ाइल में इस सूची के साथ दिए गए हैं.

अनुराज दीक्षित जी ने इस उपलक्ष में एक छोटा सा ज्ञानवर्धक लेख भी लिखा है जो इस प्रकार है - 

"प्रिय साथियों,
   हम सभी के लिए यह परम हर्ष का विषय है,कि हमारी बाल सखी इंद्र्जाल कॉमिक्स ने इस वर्ष मार्च माह में [अपने स्वर्ण जयन्ती वर्ष में प्रवेश कर लिया तो नही कहूँगा] अपनी प्रथम प्रकाशन तिथि के 50 वर्ष पूर्ण कर लिए | यूँ तो इंद्रजाल कॉमिक्स का अवसान, लेख-प्रमाण सूची, में तकनीकी रुप से, तो अप्रैल 1990 में ही हो गया था, किन्तु king is dead, long live the king की तर्ज पर हम सभी ने उसे अपने दिलों में ज़िन्दा रखा, और शायद आमरण यह हमारे दिलों में जीवित रहेगी| साथ ही मेरा यह भी विश्वास है,कि इस चित्र धारा के महान पात्रों की  आकर्षक कथाए बचपन की मधुर स्मृतियों के रुप में हमारे मन, मस्तिष्क व आत्मा में सदा,सदा के लिए अंकित रहेगी|
        साथियों यूँ तो इस चित्र कथा के प्रमुख पात्र वेताल [phantom] पर अनेक देसी व विदेशी ब्लागो में बहुत कुछ लिखा जा चुका है, या यूँ कहें कि,शायद सभी कुछ | किन्तु व्यक्तिगत् तौर पर मैंने यह अनुभव किया,कि इस कॉमिक्स के अन्य पात्रों की कुछ हद तक कॉमिक प्रेमियों, व लेखकों के द्वारा उपेक्षा की गयी है | साथ ही मैंने यह भी महसूस किया, कि अंग्रे़जी भाषा में इंद्रजाल कॉमिक्स के क्षेत्र में तो फिर भी कुछ कार्य करने का प्रयास हुआ है| लेकिन हमारे देश की आधिकारिक भाषा हिंदी में इस पर कार्य नग्णय स्वरूप ही है |
    जैसा कि आप सभी जानते है,कि वेताल के अलावा मैण्ड्रेक, फ्लैश गॉर्डन, कैरीड्रैक,रिपकिर्बी, गार्थ, माइक नोमेड, जॉन ड्रैक, ब्रूस ली, जैसे विदेशी पात्रों के साथ साथ न केवल बहादुर, दारा, व आदित्य सरीखे भारतीय पात्रों का भी समावेश इंद्रजाल कॉमिक्स में किया गया है.बल्कि प्राचीन भारतीय पौराणिक कथाओं व आधुनिक भारतीय सैन्य युद्ध व उनकी शौर्य गाथाओं को भी हमारी प्रिय चित्र कथा में पर्याप्त स्थान दिया गया है | उक्त सभी पात्रों के अपने पृथक कथाकार व कलाकार हुए है, इस दृष्टि से, ख़ास तौर पर इंद्रजाल कॉमिक्स के सन्दर्भ में किसी पात्र विशेष का विश्लेषण ही न्यायोचित व पर्याप्त नही होगा |
 साथियों,अपनी इस प्रिय चित्रकथा के प्रकाशन तिथि की 50वीं वर्षगाँठ के अवसर पर हिन्दी इंद्रजाल कॉमिक्स के क्षेत्र में मैंने कुछ अभिनव प्रयोग करने का प्रयास किया है| जिसमे मैंने संपूर्ण 803 हिन्दी इंद्रजाल कॉमिक्स के आवरण पृष्ठ सहित यथा संभव उनमे प्रकाशित कहानियों व उनके कथाकारों, और कलाकारों के नाम सहित उनकी प्रकाशन तिथि व कुछ अन्य रोचक आँकड़े देने का प्रयत्न किया है | इस महती प्रयास में मैं कितना सफल या असफल रहा? यह प्रश्न उतना महत्वपूर्ण नही है | बल्कि यक्ष प्रश्न तो यह है कि आप इसे कितना पसंद करतें है ? यदि आपके पास इंद्रजाल कॉमिक्स के सम्बन्ध में कोई विशेष जानकारी हो, जो मेरी सूची में उपल्ब्ध नही है, तो उस नवीन जानकारी का स्वागत है | यदि भूलवश कोई जानकारी त्रुटिपूर्ण हो तो उसके लिए क्षमा प्रार्थी हूँ |

इंद्रजाल कॉमिक्स-- कुछ तथ्य
इंद्रजाल कॉमिक्स के प्रारंभिक दौर में मूल कथा की पृष्ठ संख्या तुलनात्मक रुप से कम होती थी,किन्तु कुछ अन्य दिलचस्प लघु कथाये उनमे शामिल होती थी, जिनका अस्तितव बाद के दौर में समाप्त हो गया | उदाहरण के लिए-- 
1--संख्या 1 से 25 तक नियमित रुप से एथेलस्टोन स्पिल्हास द्वारा रचित चित्र कथा '' विज्ञान का युग'' इंद्रजाल कॉमिक्स की शोभा बढ़ाती रही |

2--इसी प्रकार उस दौर की एक अन्य प्रसिद्ध चित्र-कथा ''कुंजू पिल्ले का विश्व भ्रमण'' थी,जिसका संख्या 1 से 24 तक निरंतर इंद्रजाल कॉमिक्स में समावेश किया गया | इसके माध्यम से विश्व के प्रमुख शहरॉ के इतिहास व वहां पाये जाने वाले प्रसिद्ध स्थानों का ज्ञान पाठकों को करवाया जाता था | दिलचस्प बात यह है,कि इस चित्र-कथा के प्रारंभ के प्रथम 16 अंकों के रचयिता कलडी व अंक 17 से 24 तक के रचयिता महान आवरण पृष्ठ चित्रकार बी.गोविन्द थे |

3--इसके अतिरिक्त तलवलकर द्वारा रचित्‌ ''गुरु जी का क्लब'' भी उस काल-खंड की एक अन्य लोकप्रिय चित्रमाला थी,जो इंद्रजाल कॉमिक्स के प्रथम अंक से तीसवे [संख्या 1 से 30 तक] अंक तक निरंतर अपना स्थान बनाती रही |

4--संख्या 38 व 40 में डेव ब्रेगर द्वारा रचित चित्र-कथा ''घर के बुद्धू'' शीर्षक से प्रकाशित हुई |
      किन्तु उक्त सभी लघु चित्र-कथाये समय के साथ साथ अतीत के गर्त में समाती चली गयी,और 60 के दशक के मध्य तक जब इंद्रजाल कॉमिक्स की मूल कथाओं की पृष्ठ संख्या में वृद्धि हो चुकी थी,इन लघु चित्र-कथाओं का पूर्णतया विलोप हो गया |

5--किन्तु अन्य क्षेत्रों की तरह इस क्षेत्र में भी हमे अपवादों का दर्शन होता है, अर्थात सभी लघु-कथाओं का हश्र ऐसा नही हुआ |
इनमें से कुछ ने लंबे समय तक इंद्रजाल कॉमिक्स में अपना स्थान लोकप्रियतापूर्वक व सफलता के साथ बनाए रखा | जैसे- डॉन ट्रेच्टे द्वारा रचित पात्र गुणाकर [हेनरी],जिसका इंद्रजाल कॉमिक्स में सर्वप्रथम उद्भव अंक 25 में देखने को मिलता है,
प्रथम छोटे राजा [रचित सोग्लो] इंद्रजाल कॉमिक्स के अंक 20 में प्रकाशित हुआ था |

6-- मानो या ना मानो [रिप्लेका]सर्व प्रथम इंद्रजाल कॉमिक्स के अंक 30 में प्रकाशित हुई| बाद के अंकों में आस्टिन कुटिन्हो की '' खेल भावना के साथ'' ने भी काफी लोकप्रियता अर्जित की |

7- इंद्रजाल कॉमिक्स के 803 अंकों में से 153 अंक मैंण्ड्रेक, 74 अंक बहादुर, 53 अंक फ्लैश गार्डन, 20 अंक रिप किर्बी, 17 अंक गार्थ, 15 अंक कैरी ड्रैक, 15 अंक बज सायर, 11 अंक माइक नोमेड, 11 अंक फिल कोरिगन, 8 अंक दारा,5 अंक जॉन ड्रैक, 4 अंक ब्रूस ली,व 3 अंक आदित्य नामक पात्र के है| शेष अंक वेताल कथाओं के है |

8- अन्य में 33 से 44 अंक के मध्य वाल्ट डिस्ने के 7 अंक, 197 से 215 अंक के मध्य 6 युद्ध गाथा, अंक 209 से 278 अंक के मध्य 5 पौराणिक गाथा,व अंक 221 से 247 के मध्य 4 अन्य गाथा का समावेश इंद्रजाल कॉमिक्स में है |

9-फ्लैश गॉर्डन,रिप किर्बी व अन्य कुछ कथाए किसी अंक का दूसरा भाग बन कर भी प्रस्तुत की गयी है | उन्हें मूल कथाओं की सूची में शामिल नहीं किया गया है |

10-- इंद्रजाल कॉमिक्स में कुल 81 कथाओं का पुन:प्रकाशन हुआ है| यह सिलसिला अंक 321 [जो कि अंक 51 का पुन:प्रकाशन था] से प्रारंभ होकर खंड-26 संख्या39,[जोकि अंक 2 का पुन:प्रकाशन था] तक चला है|

11-- इंद्रजाल कॉमिक्स के आवरण पृष्ठों का चित्रांकन सर्वाधिक गोविन्द बी. ने किया है, एवं उनके चित्रांकन को सबसे अधिक सराहा भी गया है|इनके अतिरिक्त शेहाब, पी.जी.बंदोड्कर, रवि परांजपे, सी.मनोहर, प्रमोद ब्र्म्हाणिया, प्र्भाशंकर बी.कवडी, आनंद सुले, व राम वाईर कर आदि कलाकारों ने भी इस चित्रकथा के आवरण पृष्ठों पर अपनी कला के नमूनों को उकेरा है|

12-कुछ मानवीय त्रुटियाँ भी हमे देखने को मिलती है,|जैसे, खंड 24 संख्या 14 [प्रेत का जन्म] को अंक 49 [परम्परा के रहस्य]का पुन:प्रकाशन बताया गया है,| जो कि ग़लत है,क्यों कि प्रेत का जन्म के कलाकार विल्सन मेकोय है,जबकि परम्परा के रहस्य की 5 कथाओं में से 4 के कलाकार बिल लिग्नांट व 1 के साय बेरी है|इसी तरह यदि आप अंक 110 [डायना की अग्नि परीक्षा] के आवरण पृष्ठ  पर नजर डालें,जिसमे डायना को धनुष चलाते दिखाया गया है, तो आप पायेंगे कि डायना ने दाहिनी आँख को दबाया है,जबकि उसे बाईं आँख दबाना था| यदि आप ''वेताल की आन'' व ''मौत से सामना''[कैरी ड्रैक] नामक अंकों पर नजर डाले,तो पता चलता है कि दोनों कि अंक संख्या 369 है|"




9 comments:

Vidyadhar said...

Thanks for the Info. :)

Vidyadhar said...

Happy Birthday Month :)

AJAY said...


A very nice project . Thanks for sharing .

#15 was first reprinted with # 297 .

#52 -(Phantom story) was reprinted as # 321

A better option would have been to post # 1 Hindi in HQ , earlier shared on blogs are only digitally camera clicked photos only . I know there so many others Hindi comics collectors too enjoying very nice posts and good human values too .

Ajay

AJ said...

Thanks. can't find words to appreciate the work & efforts done by you and others involved to get this accomplished.

Nishad said...

Great work done Anuragji.
Hats of to you.
Really amazing.

Astr said...

Maine kabhi Indrajal/Chandamama comics ko haath nahi lagaya. Meri comics mein ruchi tab badhi jab Diamond comics aur Champak ka vitran evam prachalan kaafi badh chuka tha.

All this information is like Goldmine for me. Sabhi ka bohot bohot dhanyawaad, Khaaskar ke Anupam ji aur Anuraj ji ka :)

Shivkumar Vaishnaw said...

Thanks Anupam Bhai & Anurag bhai for the information & Hindi List.

Anirudh Henry said...

Happy 50th Birthday to IJC and every IJC lover.
Amazing work by Anurag ji.....Long live every lover of IJC..thank you Anupam ji and everyone.

PD said...

एक आश्चर्यजनक तथ्य बताना चाहूँगा. मैं एक महिला को कई सालों से इंटरनेट से जानता था. उनके कामिक्स प्रेम से भी परिचित था. मगर अभी हाल फिलहाल में मुझे उन्होंने बताया कि उनके पास 60 के दशक के पहले प्रति से लेकर इंद्रजाल कि आखिरी प्रति तक, सभी प्रतियाँ सुरक्षित है.