Tuesday, July 3, 2007

गोदान - मुंशी प्रेमचंद

'गोदान' हिंदी के महानतम उपन्यासकार मुंशी प्रेमचंद जी कि अन्तिम रचना है। ईसे उनकी सर्वोत्तम कृति माना जाता है। हरी
अपनी पुरी जिंदगी एक गाय के लिए प्रयत्न करता है। उसे गाय तो मिल जाती है पर उसकी कीमत उसे अपनी जिंदगी देकर चुकानी पड़ती है। उसकी मौत के पश्चात गांव का पुजारी उसकी विधवा से आत्म की शांति के लिए एक गाय कि माँग करता है। भारत के समाजिक कुरीतियों पर प्रहार करती ये रचना आपके सम्मुख प्रस्तुत है -

उपन्यास का प्रत्येक भाग अलग-अलग फ़ाइल मे है - सभी फ़ाइल एक साथ जिप हैं -

2 comments:

Comic World said...

Anu,nice Premchand book..i will be looking for more of Hindi Sahitya here,keep going don't feel discouraged by absents of comments as 99% of visitors do not leave comments.

Anupam said...

@comic guy - thanks buddy. 2 more great novels of Premchand has been added.
1. Nirmala
2. Poos ki Raat
Hope you will love them...